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Indian Youth Parliament

NE:National Session2022


 

उभरता उत्तर-पूर्व: लोकतान्त्रिक परिप्रेक्ष्य

{Emerging North-East India: Democratic Perspective}

 

भारत केवल यह ध्वनि सुनते ही आंखों के सामने आने लगते हैंकितने ही रंगनदियांपहाड़वन संपदा और इन सबके साथमानव सभ्यता के विकास के आरंभिक चरण और अत्यंत विकसित समाज। इस राष्ट्र की विविधता इसकी विशेषता की पर्याय हैंउत्तरदक्षिणपूर्वपश्चिम ये केवल नहींहम तो दस दिशाओं की साकार साधना करते हैं। एक ओर सागर तो दूसरी ओर विशालकाय हिमालय जिनसे भारत पूर्ण होता हैं।

 

उत्तर-पूर्व भारत इसी हिमालय की उपत्यका और उसके समीपस्थ मैदानघाटियों से जुड़ता हुआसागर तक जुड़ता हैं। प्रचुर वन-जल सम्पदासमृद्ध सांस्कृतिकसामाजिक परंपरा से परिपूर्ण उत्तर-पूर्व का यह भारत भाग्य विधाता का अट्टू हिस्साइतिहास से वर्तमान तक भारत के साथ गुम्फित।

 


सिक्किमप.बंगालअरुणाचलनागालैंडमणिपुरमिज़ोरमत्रिपुरामेघालय और असम तक विस्तीर्ण इस भारत की सबसे अहम पहचान हैंइसके लोकतांत्रिक समाज की सुदृढ़ स्थिति। चुनावों के आमजन की सहभागितामुद्दों पर अपनी बेबाक रायसहमति-असहमति दोनों में ही तार्किकतायह सब एक सतत समाज में ही संभव हैं। विकास की वर्तमान परिभाषा में इसको ढालने में सबसे महत्त्वपूर्ण होगा यहां का नागरिक समाजसुदूर अंचलों में बसा वह व्यक्ति-व्यक्ति जो इस भारत धरा पर न्यौछावर हैं।

 

स्थानीय समाज को साधते हुएविकास को गति। पारंपरिक प्रथाओं के सम्मान देते हुएनई प्रविधियों की स्थापना और सबसे महत्वपूर्ण कड़ीउत्तर-पूर्व के युवाओं के देश के विकासउन्नति और लोकतंत्र को सुदृढ़ीकरण में भूमिका में लाना। शासन के साथ समाजसमाज की साथ व्यक्ति का तारतम्य इसी प्रतिमान पर उत्तर-पूर्व का चेतन स्वरूप विकास भी और लोकतंत्र भी दोनों को साथ-साथ साधने की उड़ान भरने को आतुर हैं।

 

कुटीर उद्योगशैक्षिक संस्थायिकरणखेलकूद से लेकर कौशल विकाससामाजिक सशक्तीकरणआवागमन की सुलभताप्रचुर सम्पदा का तार्किक उपयोगसीमाई क्षेत्र होने से संवेदनशील प्रशासनिक ढांचा भी सबके साथ इस क्षेत्र के स्वरुप को गति देना ही मूल में हैं। सारा भारत आपस में मिले-जुड़े और जुटें भी तभी देश का वैभव बनेगादेश विकास के प्रतिमानों को साधेगा और तब समतामूलकसामरस्य समाज होगाअसली भारत साकार होगा।





{Emerging North-East India: Democratic Perspective}

 

India begins to appear before the eyes only on hearing this sound, so many colours, rivers, mountains, forest wealth and with all this, the early stages of development of human civilization and highly developed society. The diversity of this nation is synonymous with its specialty, it is not only North, South, East, West, we do spiritual practice of the ten directions. On the one hand the ocean and on the other hand the giant Himalayas from which India is complete.

North-East India is the plateau of this Himalaya and its adjacent plains, joining the valleys, connect to the ocean. Full of abundant forest-water wealth, rich cultural, social tradition, this India of the North-East is an unbroken part of the destiny creator, intertwined with India from history to the present.

The most important identity of this India, which extends to Sikkim, West Bengal, Arunachal, Nagaland, Manipur, Mizoram, Tripura, Meghalaya and Assam, is the strong position of its democratic society. People's participation in elections, their unbiased opinion on issues, rationality in both consent and disagreement, all this is possible only in a sustainable society. The most important thing in moulding it into the present definition of development will be the civil society here, the people living in remote areas who are sacrificing on this land of India.

Accelerating development, while engaging the local society. Giving respect to the traditional practices, establishing new techniques and most importantly, bringing the youth of the North-East to a role in the development, progress and strengthening of democracy in the country.

Society along with governance, the relationship of the individual with the society, on this pattern, the conscious development of North-East and democracy are also eager to take flight to cultivate both together.

Cottage (Small home based) industry, educational institutionalisation, sports, to skill development, social empowerment, accessibility of transport, logical use of abundant wealth, sensitive administrative structure due to border area, are all at the root to accelerate the nature of this area.

The whole of India will be socialite and united, only then will the country's glory become, the country will follow the norms of development and then there will be an egalitarian, harmonious society, original India will be realised.

 

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