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Theme:-Udaipur National Session-2022

"लोकतंत्र और संवाद"

(Democracy & Dialogue)


       लोकतंत्र का आशय हैं, सबको सुनना, उस पर विचार करना तदुपरान्त जो सहमति के तत्व हैं उन्हें स्वीकारना। संवाद पारस्परिक आदान प्रदान भर नहीं अपितु पारस्परिक सामंजस्य का सर्वोत्तम माध्यम भी।

 

प्राचीन काल में सभा, समिति, सत्र और शास्त्रार्थ उसी संवाद के माध्यम होते रहे, जो वर्तमान में परिष्कृत रूप में संसद या कहें सर्वोच्च स्तर पर लोकसभा,राज्यसभा राज्यों में विधानसभा या विधानपरिषद भी कुछ स्थानों में स्थानीय    या  निचले स्तर पर नगर और ग्रामीण स्तर पर ग्रामसभा के रूप में वर्तमान हैं।

 

वस्तुतः ये माध्यम औपचारिक रूप से हैं पर भारतीय समाज में तो संवाद पदे पदे मिलता हैं, जहां एक पूरा साहित्य की प्रश्नोपनिषद के रुप में मिलता हैं।

 

नचिकेता-यम, युधिष्ठर-यक्ष, रघु-कौत्स, ध्रुव ऐसे अनगिनत उद्धरण मिलते हैं जहां कोई आयु की सीमा से परे अपनी जिज्ञासा, प्रश्नो के उत्तर पाने की जिजीविषा दिखती हैं और उत्तर भी मिलता हैं।

 

भारत के लोकतंत्र में कालखंड या कहें आंशिक विरामों में भी संवाद आगे बढ़ता रहा हैं। विचारधारा का जो संघर्ष पश्चिम में हैं वह भारत में उस रूप में नहीं हैं। भारत की विविधता में से भी संवाद का प्रस्फुटन होता हैं, भू-सांस्कृतिक समरूपता इसके मूल में हैं।


विचारों की मतभिन्नता में भी संवाद आवश्यक हैं, वाद-विवाद के बाद, तार्किकता के आधार पर किया गया निर्णय ही सार्वकालिक और सार्वभौमिक होता हैं। बहुत बार सत्ताएं बहुमत पर निर्णय ले भी लें तो भी वे निर्णय लम्बे समय के लिए उपयोगी हो ही यह आवश्यक नहीं।

 

सत्ता, विपक्ष दोनों की धुरी जनमत हैं और जनमत से निरंतरता से संवाद ही लोकतंत्र की सफलता को तय करता हैं। सामान्यतः इसे सत्ता से परिवर्तन के रूप में भी देखा जाता हैं। ऐसे भी उदाहरण मिलते हैं, जब लोकतंत्र के पहरूपीये राजनैतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव दिखता हैं, अर्थात वहां संवाद न होकर शीर्षस्थ नेतृत्व द्वारा नियत निर्णयों को ही क्रियान्वयन करना मजबूरी होती हैं इससे न केवल राजनैतिक दल अपितु लोकतंत्र की मजबूती भी कमजोर होती हैं।

 

लोकतंत्र और संवाद के इस सत्र में युवाओं की सीधी सहभागिता होगी, जिसमें वे अपने प्रश्नों, जिज्ञासाओं को विविध क्षेत्रों के नेतृत्व के सामने रखेंगें, अपनी बात रखने का तौर तरीका भी सीखेंगे और साथ ही विभिन्न विषयों की गहराईयों को भी जानेंगे।


"Democracy & Dialogue"



Democracy means listening to all, considering it and then accepting the elements of consent. Dialogue is not just a mutual exchange but also the best medium of mutual reconciliation.


In ancient times, the assembly, committee, session and debate continued to be the same medium of communication, which is presently refined in form of Parliament or say Lok Sabha, Rajya Sabha at the highest level, Legislative Assembly or Legislative Council in the states, in some places at the local or lower level, the city and rural level. But it is present in the form of Gram Sabha.


In fact, these mediums are formal, but in Indian society, dialogue posts are found, where a complete literature is found in the form of Prasnopanishad. Nachiketa-Yama, Yudhishthara-Yaksha, Raghu-Kautsa, Dhruva, there are countless such quotes where one shows his curiosity beyond the limit of age, the zeal to get answers to questions and answers are also found.


In India's democracy, the dialogue has been progressing even during periods or even in partial breaks. The struggle for ideology that is in the West is not in that form in India. Dialogue also erupts out of India's diversity, with geo-cultural homogeneity at its core.


Dialogue is necessary even in the difference of views, after the debate, the decision taken on the basis of rationality is everlasting and universal. Many a times, even if the powers decide on the majority, it is not necessary that those decisions should be useful for a long time. Public opinion is the pivot of both the power and the opposition, and continuous dialogue with public opinion determines the success of democracy. Generally it is also seen as a change from power. There are also instances when there is a lack of internal democracy in the political parties in the form of democracy, that is, there is a compulsion to implement the decisions decided by the top leadership without dialogue.


In this session of Democracy and Dialogue, youth will have direct participation, in which they will put their questions, curiosities in front of the leadership of various fields, will also learn the way of expressing their views as well as get to know the depths of various topics.


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